झूठी FIR होने पर क्या करें ?
कानून लोगों की भलाई के लिए बनाए गए हैं, ताकि लोग देश में शांति से जीवन यापन कर सकें, कोई उन्हें बेवजह परेशान ना करे... कानून के भय से लोग अपने दायरे में रहेंगे तो अव्यवस्था नही फैल पाएगी... कानून की पालना के लिए देश में एक पूरा सिस्टम बना हुआ है... सरकार से लेकर कोर्ट तक और कोर्ट से लेकर पुलिस तक... ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो... लेकिन कभी कभी लोग दुर्भावना से किसी के ऊपर कोई झूठा परिवाद यानी केस दर्ज करवा देते हैं... पुलिस और केस दर्ज करवाने वाले को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जिसके ऊपर केस दर्ज होता है, उसकी पूरी जिंदगी खराब होने की संभावना होती है... केस में उलझने के बाद व्यक्ति ना काम कर पाता है और ना ही अपने घर को संभाल पाता है... इस तरह के झूठे परिवाद या केस से निपटारा पाने के लिए भी व्यवस्था की गई है... लेकिन हम जानकारी के अभाव में परेशान होते रहते हैं... झूठे केस या परिवाद या मुकदमे को किस तरह रद्द करवाया जा सकता है... आज उसी पर ये लेख है...
झूठी एफआईआर या मुकदमा
पिछले लेख में बताया था कि क्राइम यानी अपराध दो तरह के होते हैं Cognizable offence और Non Cognizable offence अगर कोई आपके ऊपर Cognizable offence के आपके ऊपर FIR करवा देता है तो पुलिस बिना वारंट के भी आपको गिरफ्तार कर सकती है... जैसे हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती, अपहरण आदि में...!
और Non Cognizable offence यानी सामान्य मामलों में पुलिस बिना वारंट के आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती... इसमें आपके खिलाफ कोर्ट से वारंट लेकर आना पड़ता है...!
अगर आपके ऊपर झूठी FIR हो जाती है तो आप अग्रिम जमानत ले सकते हैं या गिरफ्तार होने के बाद आप जमानत यानी बेल सकते हैं...!
झूठी FIR में अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए CrPC की धारा 482 के तहत आपको कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होती है... इसके बाद अपने पक्ष में सबूत लाने होंगे, जैसे कोई ऑडियो, वीडियो, फोटोग्राफ, कोई कागजात या फिर कोई गवाह... जिसे दिलवाने में न्यायालय यानी कोर्ट आपकी मदद करेगा...!
कोर्ट में सुनवाई में आप निर्दोष साबित हो जाते हैं तो आपके खिलाफ दर्ज करवाई गई एफआईआर रद्द हो जाती है और आपके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती... यहां ये बात भी नोट करनी चाहिए कि... जब तक आपकी सुनवाई कोर्ट में हो रही है तब तक आपको पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकती... अगर पहले से गिरफ्तार नहीं किया गया है तो...!
आपके खिलाफ दर्ज करवाई गई एफआईआर जब झूठी साबित हो जाती है तो, दर्ज करवाने वाले के खिलाफ IPC के सेक्शन 500 और 211 के तहत कोर्ट उसको सजा या जुर्माना लगाया जाएगा... इस मामले में आप मानहानि का केस कर सकते हैं या फिर अपनी मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानी के एवज में हर्जाने की मांग कर सकते हैं...
झूठी एफआईआर रद्द करने के मामले में कोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व मामलों में निर्णय और उसके दिशा निर्देश भी आपको ज्ञात होने चाहिए...
1993 में भजनलाल वर्सेज स्टेट ऑफ हरियाणा और 2017 में परवल भाई अहीर वर्सेज स्टेट ऑफ गुजरात के मामलों में ये निर्देश दिए गए हैं...
- जब दोनों पार्टी समझोता कर ले तो परिवाद खत्म
- जब सिविल मैटर का मामला हो तो भी परिवाद खत्म समझा जाता है.
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